शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

समझौता / Samajhauta

मुझको क्या चाहिए था मुझे क्या हुआ हासिल
जब भी खुद को समझाया मैं समझौता ही बन गया!

मेहरबानी / Meharbani

जी रहे थे हम अपनी हिस्सों में ज़िन्दगी
आप हिस्सा बने इसका मेहरबानी आपकी!!

कुछ खता / Kuchh Khata

कुछ खता हमसे हुई और कुछ निगाह-ए-यार से
देखते हैं आज हमको वो बेगानावार-से!

एक बार / Ek Baar

कर दे भले ही दूर वो पतंग कि तरह
एक बार आ के डोर जो वो थाम ले बहुत!

शिक्षा दी है / Shiksha Dee Hai

साधक को सदा ज्ञान की दीक्षा दी है! 
याचक को सदा प्रेम की भिक्षा दी है!! 
माँ, बहन, पत्नी, प्रिया, बेटी बन कर,
नारी ने हर एक रूप में शिक्षा दी है!!

गाँव की माटी / Ganv Ki Mati

मुझको कह रही है मेरे गाँव की माटी
घर न आ पर जहाँ रहे खुशहाल ही रहना

कुछ लोग / Kuchh Log

कुछ लोग डूब जाते हैं साहिल तलाशते
कुछ लोग डूबने को ही साहिल पे आते हैं!