शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

मेरी कस्तूरी / Meri Kastoori

वो,
जो रहती है
हर पल
मेरे पास,

मेरी साँसों में,
मेरी धड़कन में,
मेरे सपनों में,
मेरे दिल में,
मेरी आहों में,
मेरे मन में!

मैं,
जो ढूंढ़ता हूँ
हर पल
कहीं दूर,

गावों में,
गलियों में,
गुलशन में,
कलियों में,
पनघट पे,
सखियों में!

वो,
जो बसी है
मुझ में ही!

मैं
अनजान
उसे ढूंढता हूँ
भटकता भी हूँ
ठीक,
एक मृग की तरह!

आख़िर,
क्यों न
भटकता रहूँ!

वो,
जो है
मेरी कस्तूरी!!

तेरी ये यादें / Teri Ye Yaden

मेरे दिल को पल में कर देती हैं खण्डहर
तेरी  ये  यादें  बवण्डर से  कम  नहीं!!

कहते हैं / Kahte Hain

कहते हैं- साथ हमारा देगा,
ये डूबते को किनारा देगा !
एक उम्मीद जगा देता है,
और तिनका क्या सहारा देगा....

जिस शख्स को / Jis Shakhsa Ko

जिस शख्स को बरसों-बरस से जानता था मैं...
अब लग रहा है कि केवल पहचानता था मैं!!

उन्वान क्या रखूँ / Unwan Kya Rakhoon

ज़ुबां ख़ामोश रहती है,
नज़र हर बात कहती है...
कहानी कौन-सी है ये?
कहो उन्वान क्या रखूँ??

हक़ / Haq

चाँद पर हक़ मेरा इतना है, उसको देख लेता हूँ !
उसे पाने की चाहत का भी मुझको हक़ मयस्सर कब?

अब / Ab

कोई पत्थर कहाँ से बने ताज अब,
हाथ कटते हमेशा हुनर के लिए!
कैसे उड़ने की हिम्मत परिंदा करे,
काट डाला जिसे बाल-ओ-पर के लिए!